Thursday, May 26, 2022
HomeNoticias de Entretenimiento'केजीएफ चैप्टर 2', 'आरआरआर' और 'पुष्पा- द ¢ में' में मेरे पास...

‘केजीएफ चैप्टर 2’, ‘आरआरआर’ और ‘पुष्पा- द ¢ में’ में मेरे पास माँ है … के अलावा ये हैं 5 कॉमन फैक्टξ.

इन दिनों, अगर किसी तीन फिल्मों के बारे में सबसे अधिक चर्चा है तो वे हैं मूल ूप से से में बनीं फिल्म आरआरआर और पुष्पा और मूल रूप से कन्नड़ में बनी फिल्म 2, हाल ही में इन तीन फिलutar नि: संदेह यशअल्लू अर्जुन, रामचरण और जूनियर एनटीआर फिलहाल पैन इंडियन सबसे बड़े सुपरस्टार के रूप में उभर चुके हैं, अपनी फिल्मों के किरदारों की से।।।।।।।।।।।।।।। ऐसे में मैंने भी इन तीनों फिल्मों को दोबारा देखा और मुझे कुछ कॉमन फैक्टर इन तीनों ही फिल्मों में नजर आये हैं और उन 5 फैक्टenas को मैंने यहाँ शामिल करने की कोशिश की है, जो मेरी अपनी समझ से इन फिल्मों को आम लोगों कनेक कनेक्ट कर पाने में सहायक साबित हो ही।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।। मुमकिन है कि ये कॉमन फैक्टर्स, कॉमन मैन को भी पसंद आये हों, मैंने बस कॉमन मैन मैन के नजरिये से ही, इन फिल फिल्मों को देखने की कोशिश है।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

मेरे पास माँ है, लौटा माँ के सम्मान की रक्षा वाल्या य्

मैंने गौर किया कि 2 की तो पूरी कहानी ही एक माँ को 8मर्पित एक बेटा, अपनी माँ की ख्वाहिश को पूenas करने के लिए कोई भी कीमत चुका सकता है। एक गरीब लाचार माँ, जिस तरह से अपने बेटे को एक स्ट्रagaंग इंसान बनाती है और फिर वह गलियों की ख़ाक छानने वoque लड़का, एक बड़ आदमी है है है।। है है ión दिलचस है है हैella. वहीं पुष्पा फिल्म में भी गौर किया, तो मैंने महसूस किया कि पुष्पा की बचपन से ही बस एक ही ब mí है, तो वहीं आरआरआर में किसी व्यक्तिगत माँ की नहीं, बल्कि भारत माँ की रक्षा की कहानी यानी क्रांति की कहानी दिखाई गई ऐसे में इन तीनों ही फिल्मों में माँ और भारत म sigue. कई दौर से जहाँ, मांओं की भूमिक mí दीवार फिल्म का वह संवाद, मेरे पास माँ है… फिल्म से एक बार चरितार्थ हुआ।

Fuente: Instagram I @thenameisyash

दबे-कुचले आम वर्ग से एक नायक का आना और पूरी दुनिया पर छा जाना

दूसरी बात, जो मैंने महसूस की कि अब लोगों को अपना नायक, लग्जरी कार से निकलते नहीं नहीं, बल्कि नीचे दबे-कुचले वर्ग, जिन्हें हमेशा सामंतव मंतव ने दब य है है बीच उनके यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक यक।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।. 2 क sigue. पुष्पा भी कुछ ऐसा ही नायक है। आरआरआर में भी अंग्रेजों द्वारा लगातार भीम पर जुल्म किये जाते हैं, लेकिन वह और स्ट्रagaंग नायक बनता जाता है, तो दर्शक ऐसे किरदारों से endr दenas को फ़िल्मी डायलॉग बोलते हुए उनके नायक पसंद आ रहे हैं, लेकिन उन डायलॉग में भी वह लोगों लोगों, अपनी जमीन की बात करते नजर आ हे हैं, यह ब • भी उन उन आक razón क क हैं।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

Fuente: Instagram I @ssrajamouli

अपनी जमीन और अस्तित्व की बात

मेरा मानना ​​है, तो इन तीनों ही फिल्मों में लारorar. देन लाइफ अनुभव दिखाए गए हैं, लेकिन ही ही फिल्मों के किरदार अपनी-अपनी जमीन के अस अस्तित्व की ब ब क हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं हैं आरआरआर का भीम आदिवासियों के जंगल और जमीन को बचाने के लिए, किसी भी हद तक जाने को तैयार है।।।।।।। केजीएफ की दुनिया में रॉकी भाई को अपने लोगों के लिए एक अलग दुनिय mí पुष्पा में भी जंगल-जमीन और अपने लोगों के अस्तित्व क।ईॾ

Fuente: Instagram I @alluarjunonline

फिलहाल सोशल मेसेज के मूड में नहीं हैं दर्शक

मेenas मानना ​​है कि सिनेमा का एक महत्वपूर्ण काम है कि किसी न किसी तरह से एंटरटेनमेंट मिले और कहानी एंगेजिंग।।।।।।।।।।।।।। पिछले कुछ समय से मैंने गौर किया है कि सोशल मुद्दे वाली कहानियों को दû औसत ही आंक आंक endr कदर बैठे हैं और ओटीटी दुनिय mí

ल sigue, देन लाइफ वाली कहानियां, लेकिन लग्जरी कार वाली नहीं

इन तीन फिल्मों के सिनेमेटिक अनुभव को भी नकार marca नहीं जा सकता है। पुष्पा ने जिस तरह से चंदन की लकड़ी, जंगल, जमीन की बातों को दिखाते हुए एक सांग का पिक्चisiones वहीं आरआरआर के हर एक्शन दृश्यों को सिनेमेटिक अनुभव के स sigue 2 ने भी लार्जर देन लाइफ दिखाने में कसर नहीं छोड़ी है, तो दर्शकों को यह सब पसंद आ ¢ endr इनके अलावा पारिवारिक इमोशन वाली फीलिंग भी देती हैं यह फिल्में।

Fuente: Instagram I @thenameisyash

वाकई मुझे ऐसा लगता है कि इनके अलावा और शायद ऐसे कई फैक्टर हो सकते हैं, जिनकी से किसी न किसी वजह से इन इन्मों के सुर, दû के स कदमत कदमत क क क razón और तर। त तenda लग त त त त -त त razón त. सो, आने वाले समय में निर्देशक और फिल्मकारों को चाहिए कि वह आम जनता की नब्ज पकड़ने की कोशिशatar

Source link

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments